Youth Voice

मन की चौबीस खिड़कियाँ

एक संगीतकार डॉक्टर के कमरे से बाहर निकल रहा है। वह अपनी बीवी की तरफ़ हाथ बढ़ाता है। इसके बजाए कि वह बीवी का...

मोदी का भारत : क्या यह नेहरूवादी विरासत का परिणाम है?

    भारत की स्वतंत्रता की पूर्व-संध्या पर अपने ऐतिहासिक भाषण ‘नियति से साक्षात्कार’ (Tryst with Destiny) में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि,...

पिता की वह ऐतिहासिक भूल, जो एक बेटे के लिए महत्वपूर्ण अवसर है

राजीव गांधी इस समय तक प्रधानमंत्री नहीं थे। वे लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मंडल आयोग की सिफारिशों पर बहस में शामिल हुए और 6 सितंबर 1990 को लोकसभा में उन्होंने मंडल रिपोर्ट पर लंबा भाषण दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने मंडल आयोग के आंकड़ों, उसकी कार्यप्रणाली और सिफारिशों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। यही वह राजनीतिक क्षण था, जब कांग्रेस और पिछड़े वर्गों के बीच पहले से मौजूद दूरी और स्पष्ट दिखाई देने लगी। राजनीतिक रूप से इसे केवल एक भाषण या एक निर्णय की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समस्या इससे कहीं बड़ी थी।

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