राजीव गांधी इस समय तक प्रधानमंत्री नहीं थे। वे लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मंडल आयोग की सिफारिशों पर बहस में शामिल हुए और 6 सितंबर 1990 को लोकसभा में उन्होंने मंडल रिपोर्ट पर लंबा भाषण दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने मंडल आयोग के आंकड़ों, उसकी कार्यप्रणाली और सिफारिशों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
यही वह राजनीतिक क्षण था, जब कांग्रेस और पिछड़े वर्गों के बीच पहले से मौजूद दूरी और स्पष्ट दिखाई देने लगी। राजनीतिक रूप से इसे केवल एक भाषण या एक निर्णय की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समस्या इससे कहीं बड़ी थी।