Politics

सामाजिक लोकतंत्र के लिए नया ‘बंगाल मॉडल’

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड चुनावी विजय के बाद जो राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत उभरकर सामने आए हैं, वे राज्य...

सत्ता, व्यवस्था और बुद्धिजीवी : फूको के सहारे वर्तमान भारत पर विचार

कल सिलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ जवाहरलाल नेहरु का एक वॉल्यूम मिला । कुछ वॉल्यूम कम क़ीमत पर कभी कभी मिल जाते हैं तो मैं ख़रीद...

बाबू जगदेव प्रसाद : राजनैतिक हलवाही के विरूद्ध

1972 में जगदेव प्रसाद और रामस्वरूप वर्मा की राजनीतिक धाराएँ और निकट आईं। 7 अगस्त 1972 को शोषित दल और समाज दल के विलय से शोषित समाज दल बना। रामस्वरूप वर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष और जगदेव प्रसाद महामंत्री बने।  लेकिन लोहियावादी सोशलिस्ट पार्टी को साथ रखने पर जगदेव प्रसाद सहमत नहीं थे। उनका तर्क था कि यदि नेतृत्व फिर से उच्च जातियों के हाथ में रहा तो शोषितों का स्वतंत्र राजनीतिक संगठन अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेगा। उनके लिए शोषितों की राजनीतिक स्वतंत्रता कोई समझौता करने योग्य प्रश्न नहीं था।  उनका यह रुख उन्हें तत्कालीन विपक्षी राजनीति की मुख्यधारा से अलग करता था। वे कांग्रेस के विकल्प के नाम पर किसी ऐसे गठबंधन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे जिसमें शोषक और शोषित दोनों एक साथ खड़े हों। उनका विश्वास था कि सामाजिक क्रांति के लिए राजनीतिक संगठन का सामाजिक चरित्र भी बदलना होगा।

वो लोकप्रिय धारणाएँ जिन पर हिंदुत्व ने सवारी की

आम बोलचाल में प्रचलित धारणाओं की अपनी राजनैतिक संरचना होती है। इन धारणाओं का निर्माण प्रभुत्वशाली वर्ग ही करता है। मसलन, भारत सोने की...

नेहरू से मोदी तक : अर्थशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में एक अवलोकन

प्रस्तुत लेख में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शासनकाल और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल की तुलना करने का प्रयास किया...

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