69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला: कौन करेगा न्याय

Date:

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला प्रकरण अब निस्तारण की ओर दिख रहा है। अभ्यर्थियों के लम्बे आनंदोलन के बाद सरकार इस ओर कदम बढ़ायी है। अब इस मामले में हाईकोर्ट  लखनऊ पीठ के 13 अगस्त 2024 के दिए गए आदेश के अनुसार 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती की पूरी लिस्ट को बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 के तहत मूलचयन सूची के रूप में सुप्रीम कोर्ट में सरकार 21 जुलाई को प्रस्तुत करेगी। सरकार ने पीठ से कहा कि पूरी लिस्ट बनाने में वक्त लगेगा, इसलिए 6 से 8 हफ्ते का समय कोर्ट ने दिया है।

तिथियों में समझे कब क्या हुआ: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 69000 शिक्षक भर्ती का आयोजन वर्ष 2018 में कराया गया। इसकी परीक्षा 06 जनवरी 2019 को हुई और परिणाम 21 मई, 2020 से जारी हुआ है। 31 मई 2020 को 67867 अभ्यर्थियों की एक चयन सूची बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गयी। जारी चयन सूची में आरक्षित वर्ग (दिव्यांगजन, दलित एवं अन्य पिछड़ा वर्ग) के अभ्यर्थियों ने पाया कि उनकों मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया गया है। इसको लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा रखी लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला।  अभ्यर्थियों ने न्याय पाने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचितजाति आयोग इत्यादि में अपनी याचिका दाखिल की, जिसमें एक वर्ष तक सुनवाई के पश्चात् राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नें दिनांक 29 अप्रैल, 2021 को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को दी, जिसमें यह स्पष्ट किया कि 69000 शिक्षक भर्ती में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं मिला। अरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आयोग के रिपोर्ट को मानने से इन्कार कर दिया, तब आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने दिनांक 22 जून 2021 से आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने के लिए अनवरत धरना- प्रदर्शन शुरू कर दिया। 06 सितम्बर 2021 को हजारों की संख्या में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी, अभिभावक सहित, ईको गार्डेन लखनऊ में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचायी। 07 सितम्बर 2021 को मुख्यमंत्री ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष मुकुल सिंघल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया गया। तीन माह तक गहन अध्ययन के बाद जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराई। मा० मुख्यमंत्री ने जाँच समिति की रिपोर्ट में पाये कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया गया। 23 दिसम्बर 2021 को मुख्यमंत्री ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मण्डल से मुलाकात की और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया कि “शीघ्र ही आरक्षण से वंचित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रदान की जाय। 24 दिसम्बर 2021 को तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्रेस को बयान दिया औरा अधिकारियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया। इसके बाद 05 जनवरी 2022 को 6800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की एक सूची बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गयी। किन्तु आचार संहिता लागू हो जाने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पायी। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने स्वयं स्वीकार किया है की उससे अरक्षण को लागू कराने में विसंगति हुई है। इसी बीच कुछ अभ्यर्थियों ने जारी 6800 चयन सूची के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। इसमें सरकारी वकील व विभागीय अधिकारियों की कमजोर पैरवी के कारण उच्च न्यायालय ने चयन सूची को रोक लगा दी। एक वर्ष से अधिक समय तक मा० उच्च न्यायालय में 69000 शिक्षक भर्ती के मामले में सुनवाई हुई। सरकारी अधिवक्ता और विभागीय अधिकारियों की कमजोर पैरवी के कारण मा० उच्च न्यायालय ने दिनांक 13 मार्च, 2023 को 6800 चयन सूची को रद्द कर दिया। इस आदेश से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी हताश हैं और मानसिक रूप से परेशान रहे। सभी अभ्यर्थियों ने न्याय पाने के लिए हाई कोर्ट डबल बेंच में याचिका दाखिल की यहां भी लंबी सुनवाई के बाद डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया की पूरी सूची फिर से नई बनाई जाए और आरक्षण नियमों का पालन किया जाए। डबल बेंच ने अपना फैसला 13 अगस्त 2024 को सुनाया था। लेकिन प्रदेश सरकार और विभाग के अधिकारी इस मामले पर मौन रहे और यह मामला मा. सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। अब इस प्रकरण पर अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होनी है।

अभी न्याय का इंतजार है

इस प्रकरण पर 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और 21 मई को कोर्ट का एक आदेश सरकार को प्राप्त हुआ है जो इस प्रकार है: उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुईं विद्वान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, सुश्री ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि 04 फरवरी, 2026 के हमारे आदेश में किए गए अनुरोध को स्वीकार करते हुए, उत्तर प्रदेश राज्य, इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए, उन उम्मीदवारों की नियुक्ति पर विचार करने के लिए तैयार और इच्छुक है, जिनके 13 अगस्त, 2024 के हाई कोर्ट के फैसले और आदेश के अनुसार, फिर से तैयार की गई चयन सूची में शामिल होने पर पात्र होने की संभावना है। बशर्ते कि मौजूदा रिक्तियां उपलब्ध हों।

1 उम्मीदवार न्यूनतम योग्यताएं पूरी करते हों, और इस प्रक्रिया को भविष्य के मामलों में एक मिसाल के तौर पर न माना जाए।

2. हम उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा लिए गए इस फैसले की सराहना करते हैं और उन्हें उपरोक्त प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह सप्ताह का समय देते हैं।

3. अगली सुनवाई की तारीख पर इस कोर्ट के समक्ष एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी।

4. मामले को 21 जुलाई, 2026 को नियमित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

5. विशेष अनुमति याचिकाओं और उनसे संबंधित आवेदनों को ‘आंशिक रूप से सुना गया’ (part-heard) नहीं माना जाएगा।

इस भर्ती प्रकरण से भाजपा का राजनीतिक समन्वय बिगड़ा

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनती है। सरकार बनाने के वक्त से ही सामाजिक न्याय का चादर ओढ़ कर दिखवा करती हैं और राजनीतिक समन्वय स्थापित करने के लिए विभिन्न जातियों से आए नेताओं को मंत्री बनाती है। लेकिन उन्हीं मंत्रियों के समाज से आने वाली समस्याओं को तब भाजपा सरकार नजर अंदाज कर देती है जब वहाँ सामाजिक न्याय की बात आती हैं। ओबीसी सामाज के नेता आशीष पटेल जब सामाजिक न्याय सामाजिक समरसता की बात करने की कोशिश करते हैं तो उनकी बातों को हल्के में ले लिया जाता है। ऊपर जो 69000 शिक्षक भर्ती आंदोलन का जिक्र इस लेख में किया गया हैं, आशीष पटेल सरकार में रहते हुए सरकार से इस विषय के समाधान के लिए लगातार प्रयत्न किया लेकिन उनकी बातों को इग्नोर कर दिया गया। इसका परिणाम भाजपा को भुगतना पड़ा और लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद स्वयं आशीष पटेल ने टीवी चैनल पर बोलते हुए इस शिक्षक भर्ती प्रकरण के समाधान न होने का ठीकरा भाजपा पर फोडा था।   वहीं जब शिक्षक भर्ती प्रकरण पर हाई कोर्ट डबल बेंच का आदेश आया तब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की लड़ाई जीत बताया था। ऐसे दिग्गज और बड़े नेताओं के बयान से एक बात तो स्पष्ट है भाजपा ने सामाजिक समन्वय और न्याय की आड़ में जो राजनीतिक समन्वय स्थापित किया था वह बिगड़ चुका हैं। सामाजिक समन्वय में स्थापित करने के लिए भाजपा को इन नेताओं और युवाओं की बातों की ओर ध्यान देना ही होगा। कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ संजय निषाद अपने समाज की समस्याओं को लेकर समय-समय पर भाजपा को  चेतावनी देते रहते हैं। जिन मांगों को लेकर यह नेता भाजपा गठबंधन दल में सहयोगी के रूप में आए अभी तक उनकी ही मांग पूरी नहीं हो सकी।

विपक्ष ने शुरू की घेरेबंदी

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वादा किया कि मुख्यमंत्री बनते ही वे 90 दिनों के भीतर 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के विवाद को सुलझाएंगे और अपने पीडीए  फॉर्मूले के तहत राज्य में जातीय जनगणना कराएंगे। गत 20 मई को समाजवादी पार्टी के ने भाजपा सरकार पर भर्तियों में आरक्षण की लूट और घोटाले का आरोप लगाते हुए “समाजवादी ऑडिट रिपोर्ट” जारी की।  इस रिपोर्ट में 69 हजार शिक्षक भर्ती, वन एवं वन्य जीव रक्षक भर्ती, बांदा कृषि विश्वविद्यालय भर्ती, एडेड जूनियर हाईस्कूल मास्टर/हेडमास्टर भर्ती, ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती, नेत्र परीक्षण अधिकारी भर्ती, यूपीएसएसएससी आशुलिपिक भर्ती, लखीमपुर को-ऑपरेटिव भर्ती, पशु चिकित्सक भर्ती, लेखपाल भर्ती, स्वास्थ्य-शिक्षा अधिकारी भर्ती, चिकित्सा अधिकारी आयुर्वेद भर्ती और कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती सहित 22 भर्तियों में कथित आरक्षण घोटाले का विवरण प्रस्तुत किया गया है। समाजवादी पार्टी ने कहा कि वर्ष 2027 में सरकार बनने पर 90 दिनों के भीतर 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को न्याय दिलाएगी और जातीय जनगणना कराने का कार्य करेगी। दावा किया कि समाजवादी सरकार सामाजिक न्याय की स्थापना करते हुए सभी वर्गों को न्याय दिलाने का काम करेगी।महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने आधी आबादी की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी, लेकिन सरकार ने इस विषय से दूरी बना ली।

क्या कहते है अभ्यर्थी

मैं अर्चना मौर्या, 69000 शिक्षक भर्ती की अभ्यर्थी हूं। इस भर्ती में आरक्षण घोटाले के कारण मुझे नौकरी नहीं मिल सकी। लंबे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और तमाम जांचों के बाद सरकार ने 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की, जिसमें मेरा नाम भी शामिल था। उस समय परिवार, रिश्तेदार और जानने वालों ने बधाई दी, सभी को उम्मीद थी कि अब हमें न्याय मिलेगा और हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। लेकिन दुर्भाग्यवश मामला कोर्ट-कचहरी में उलझ गया और आज तक नियुक्ति नहीं मिल पाई। वर्षों से हम मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ा झेल रहे हैं। सबसे दुखद बात यह है कि तब से इस विभाग में कोई नई भर्ती भी नहीं आई। सरकार की लापरवाही और देरी ने हम जैसे हजारों युवाओं की जिंदगी को अनिश्चितता और निराशा में डाल दिया है। हम केवल अपना अधिकार और सम्मानजनक रोजगार चाहते हैं।

अर्चना मौर्या, जिला आजमगढ़

मैं 69000 शिक्षक भर्ती का अभ्यार्थी हू, मेरा नाम सरकार द्वारा जारी 6800 चयनित अभ्यर्थियों की सूची में शामिल है, शिक्षक बनना मेरा सपना था, इसी के अनुसार हमने पढ़ाई की सभी योग्यता हासिल किया। वर्षों की मेहनत सफल होती दिखाई दी। लेकिन आरक्षण घोटाला और भर्ती में हुई अनियमितताओं ने सब कुछ छीन लिया। पिछले लगभग 6 वर्षों से अपने अधिकार कोलीए लड़ रहा हूँ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवस के बारह हर्ट अटैक आया तो उस वक्त लगा की अब जिन्दगी भी हार जाउंगा, उपर वाले की कृपा से लम्बे उपचार के बाद ठीक हुआ। अपने हक अधिकार के लिए पुन्: आनंदोल में शामिल होकर लड़ रहा हूं।  सुप्रीम कोर्ट से हमें उम्मीद है की नौकरी जरूर मिलेगी।

इरशाद अहमद, जिला आजमगढ़

69000 शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षण घोटाले का शिकार मैं अभ्यर्थी हूँ,लगातार 6 साल से ज़्यादा समय से इस मानसिक प्रताड़ना को झेल रहा हूँ, इस लड़ाई को मैंने सड़क से लेकर,कोर्ट और,हर उच्च अधिकारी के साथ ही सरकार में शामिल सभी पिछड़े दलित मंत्री और विधायक से मिलकर अपनी आवाज उठायी, वही जहाँ माननीय हाई कोर्ट से हमको जीत तो मिली मगर वो नियुक्ति में नहीं तब्दील हो पाया आज भी ये लड़ाई हम सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे है। हाल ही में माननीय कोर्ट ने पुनः सही से मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिया है। हमको माननीय सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है कि हमको न्याय मिलेगा।

कृष्णचंद यादव, रायबरेली

अमर बहादुर

एडवोकेट-लखनऊ हाई कोर्ट

 amar51289@gmail.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

पढ़ते-पढ़ते: मनोज पटेल

1- जैक एग्युरो -युद्ध का चेहरा (सोनेट) युद्ध का चेहरा...

The President’s Cake : इराकी सिनेमा का नायाब तोहफा

इराकी फिल्मकार हसन हादी ने अपनी फिल्म द प्रेसिडेंट’स...

साहित्य, स्मृति और इतिहास की सातवीं दृष्टि

इतिहास और साहित्य के संबंध पर विचार करते हुए...

मेरी माँ मेरी गैंग्स्टर या कुछ और

एक ऐसी अनोखी किताब जिसका अगला पाठ पिछले पाठ...