1- जैक एग्युरो –युद्ध का चेहरा (सोनेट)
युद्ध का चेहरा तुम्हारा चेहरा है। आईने मे यह तुम्हारा चेहरा है एक तख्ती लगाये हुये
जिस पर लिखा है, “मैंने उन्हे ऐसा करने दिया, अपनी खामोश के साथ मैंने अपनी
सहमति व्यक्त की, अपनी निष्क्रियता के साथ उसे अपना समर्थन दिया, एक तरह से
उसे अपना अनुमोदन प्रदान किया क्योंकि सड़कों पर मै यह चिल्लाते हुये
नहीं निकाल पड़ा , बंद करो यह सब, यह सच नहीं है, यह टेलीविज़न है’”
युद्ध का चेहरा देखने के लिये अपने आईने को देखो, टेलीविजन को नहीं ।
यह तुम्हारा चेहरा है, यूँ ही चढ़ावा चढ़ाता हुआ तुम्हारे बेटे और मेरी बेटियों का,
तुम्हारा अपना चेहरा वाहवाही करता रंगीन परदे पर अरेबियन सैन्ड।
बॉक्स गेमों का।
तुम्हारा चेहरा है युद्ध, उन लोगों का समर्थन करता है जो पीते है कच्चा तेल या
शोधित कर बैरलों से निकाल चुस्कियां लेते है बर्फ के साथ, या नशे मे चूर, उसकी
उल्टी कर देते है समुद्र मे, और फिर भी बटोरते है अपना फायदा और मुनाफ़ा।
जॉयस्टिक्स से नहीं लड़ा जाता युद्ध, निनटेन्डो या सुपर मारियो की तरह
और इसमे मरने वाले बच्चे ठोकर नहीं मार सकते, न ही कभी खड़े हो सकते है दुबारा।
चेहरे अपना पक्ष चुन लो: तुम्हारे बच्चे या तेल अल्पतन्त्र?
(जैक एग्युरो प्युर्टों रिको के प्रसिद्ध कवि है। असन विश्व पुरस्कार 2012 से सम्मानित हुये थे लेकिन अल्जाइमर रोग से पीड़ित होने के कारण वे इस सम्मान को प्राप्त करने के लिये भारत नहीं आ सके और उनकी तरफ से इसे प्राप्त करने के लिये उनके पुत्र मार्सल एग्युरो एवं पुत्री नतालिया एग्युरो त्रिवेंद्रम आये थे।)
2: युद्ध की संतान – सर्गोन बोउलुस
(एक इराकी बाछी के लिये जो युद्ध के दौरान पैदा हुई और मार गयी)
वह बच्ची आई
जो लापता हो गयी थी युद्धह मे
गलियारे के आखिरी सिरे पर खड़ी थी वह
एक मोमबत्ती लिये हुये
वह मुझे दिखती है
हर सुबह जागते ही
इंतज़ार करती हिती है
यथार्थ की दीवार से मेरे टकराने का।
समझदारी के आतंक से फैली हुई
उसकी आँखों मे धीरज है,
पहाड़ी काँटेदार झाड़ियों के बीच
जहां मेरे खयाल भटकते है रात मे
मेरे हाँथ तोड़ सकते है उसकी बेड़ियाँ
मेरी आवाज़ खड़े कर सकती है सवाल,
हत्यारे या फिर खुदा के प्रति,
सवाल जिनके जवाब उस बच्ची को मालूम है….
कितने दिनों से यह युद्धह चल रहा है बेटी?
कितनी रातें बीत चुकी हैं, किस कुयें के तल पर?
दुख का कितना अनंतकाल, कितनी दिशाओं से?
चार सितारा जनरल ने क्या किया होता अगर उन्होंने
उस बच्ची को एक भी दिन दूध से वंचित रखा होता?
बच्ची कहती है :
वे एक जहाज पर लेते गये मेरे परिवार को
दूसरी दुनिया की तरफ़
मुझे पता था कि वे मुझे छोड़ जायेंगे
अकेला, इस तट पर
मुझे पता था….
(सर्गोन बोउलुस इराक के कवि और कहानीकार है, किशोरावस्था से ही इराकी पत्रिकाओ मे कविता, लघुकथा लिखना साथ ही अमेरिकी और ब्रिटिश कविता का अरबी मे अनुवाद करना शुरू कर दिया था। )

मनोज पटेल का ब्लॉग “पढ़ते-पढ़ते हिन्दी मे खुलने वाली विश्व साहित्य की खिड़की के रूप मे जाना-पहचाना गया। मनोज ने दुनिया भर के सैकड़ों रचनाकारों की कविताओं, कहानियों, आत्मकथ्य, सूक्तियों तथा निबंध आदि का हिन्दी मे अनुवाद किया। किताब के रूप मे ‘पढ़ते-पढ़ते उपलब्ध है, जिसे हिन्दी बुक सेंटर ने प्रकाशित किया है। मनोज पटेल अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। वर्ष 2017 मे उनकी असामयिक मृत्यु हो गयी जिससे विश्व हिन्दी कविता को अमूल्य क्षति हुयी।




