Politics

पेपर लीक का दौर : उत्तर प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ते सवाल

उत्तर प्रदेश के यूपी के भीतर शासकीय रोजगार और उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला, प्रतियोगिताएं अनगिनत छात्र-छात्राओं के आने वाले कल को तय करती...

मोदी का भारत : क्या यह नेहरूवादी विरासत का परिणाम है?

    भारत की स्वतंत्रता की पूर्व-संध्या पर अपने ऐतिहासिक भाषण ‘नियति से साक्षात्कार’ (Tryst with Destiny) में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि,...

पिता की वह ऐतिहासिक भूल, जो एक बेटे के लिए महत्वपूर्ण अवसर है

राजीव गांधी इस समय तक प्रधानमंत्री नहीं थे। वे लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मंडल आयोग की सिफारिशों पर बहस में शामिल हुए और 6 सितंबर 1990 को लोकसभा में उन्होंने मंडल रिपोर्ट पर लंबा भाषण दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने मंडल आयोग के आंकड़ों, उसकी कार्यप्रणाली और सिफारिशों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। यही वह राजनीतिक क्षण था, जब कांग्रेस और पिछड़े वर्गों के बीच पहले से मौजूद दूरी और स्पष्ट दिखाई देने लगी। राजनीतिक रूप से इसे केवल एक भाषण या एक निर्णय की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समस्या इससे कहीं बड़ी थी।

अयोध्या : एक राजनैतिक यात्रा

‘राम-राम, जै रामजी की, जै सिया-राम।’ हिन्दी हार्टलैंड का एक ग्रामीण या कस्बाई हिन्दू एक-दूसरे से भेंट-मुलाकात होने पर इन्हीं में से एक का...

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