हिमाचल का पहाड़ केवल भौगोलिक प्रदेश नहीं है, बल्कि अपने भीतर प्रकृति, लोकसंस्कृति, परंपराओं, श्रम, जीव-जंतुओं और मनुष्य की गहरी संवेदनाओं को समेटे हुए...
1972 में जगदेव प्रसाद और रामस्वरूप वर्मा की राजनीतिक धाराएँ और निकट आईं। 7 अगस्त 1972 को शोषित दल और समाज दल के विलय से शोषित समाज दल बना। रामस्वरूप वर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष और जगदेव प्रसाद महामंत्री बने। लेकिन लोहियावादी सोशलिस्ट पार्टी को साथ रखने पर जगदेव प्रसाद सहमत नहीं थे। उनका तर्क था कि यदि नेतृत्व फिर से उच्च जातियों के हाथ में रहा तो शोषितों का स्वतंत्र राजनीतिक संगठन अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेगा। उनके लिए शोषितों की राजनीतिक स्वतंत्रता कोई समझौता करने योग्य प्रश्न नहीं था। उनका यह रुख उन्हें तत्कालीन विपक्षी राजनीति की मुख्यधारा से अलग करता था। वे कांग्रेस के विकल्प के नाम पर किसी ऐसे गठबंधन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे जिसमें शोषक और शोषित दोनों एक साथ खड़े हों। उनका विश्वास था कि सामाजिक क्रांति के लिए राजनीतिक संगठन का सामाजिक चरित्र भी बदलना होगा।