उत्तर प्रदेश के यूपी के भीतर शासकीय रोजगार और उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला, प्रतियोगिताएं अनगिनत छात्र-छात्राओं के आने वाले कल को तय करती हैं। कोई इनके जरिए अध्यापन के क्षेत्र में कदम बढ़ाना चाहता है। कोई खाकी वर्दी पहनने की चाह रखता है, तो कोई राजस्व विभाग में सेवा देना चाहता है। इनमें से ही लोक सेवा आयोग के सम्मानित पदों का सपना देखता है, तो किसी का लक्ष्य चिकित्सा विज्ञान या केंद्रीय संस्थानों में दाखिला पाना होता है। इन्हीं महत्वाकांक्षाओं के बीच जब भी कोई इम्तिहान प्रश्न-पत्र आउट होने, अनुचित साधनों के प्रयोग, छात्र परीक्षार्थियों, डिजिटल फ्रॉड या व्यवस्था में चूक के कारण सवालों के घेरे में आ जाता है। जिसकी प्रभाव मात्र एग्जाम हॉल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका गहरा धक्का समूचे सामाजिक ताने-बाने को झेलना पड़ता है। बीते 5 साल यानी सन् 2021 से 2026 के मध्य युवाओं, यहां के प्रतियोगीयों/परीक्षार्थियों के जीवन को हिला देने वाले कई बड़े टेस्ट सारांश और झमेले में फंसे रहे, जिनमें से कुछ को पूरी तरह निरस्त करना पड़ा तो कई का री-एग्जाम आयोजित हुआ। क्योंकी रिजल्ट और ज्वाइनिंग में विलंब हुआ, जबकि कुछ में अनुचित तौर-तारीकों के आरोप लगने के बावजूद पूरी प्रक्रिया को खारिज नहीं किया गया। इनमें से कुछ उच्चस्तर की भर्तियां थीं, तो कुछ देश व्यापी पात्रता परीक्षाएं, जिससे देश में अनगिनत नौजवानों पर इसका सीधा और गहरा प्रभाव पड़ा।
किस समयाविधि में कौन सी प्रतियोगिता बाधित हुई, उसमें कुल कितने पद या सीटें दांव पर लगी थी। किस प्रकार की धांधली के दावे किए गए, शासन या संबंधित बोर्ड ने क्या कानूनी कदम उठाए, दोबारा इम्तिहान का आयोजन हुआ अथवा नहीं। अंतिम चयन या नतीजे का वर्तमान स्टेटस क्या है? यहां इस बात पर ध्यान देना भी आवश्यक है कि प्रत्येक वर्ष एक ही ढर्रे से इम्तिहान या किसी एक ही विभाग की भर्ती में खामियां नहीं दिखीं। अलग-अलग समय पर विभागों की भिन्न-भिन्न परीक्षाएं बाधित हुई। जिनमें कभी पात्रता मूल्यांकन तो कभी सीधी रोजगार भर्ती, कभी प्रवेश प्रतियोगिता, तो कभी विश्वविद्यालय योग्यता परीक्षा थी। इसी वजह से प्रभावित पद प्रश्न-पत्र का प्रकाशन इम्तिहान का स्थगन तथा सफल नियुक्ति इन चारों मुख्य घटनाओं का पृथक विश्लेषण करना अत्यंत अनिवार्य है।
- वर्ष 2021 : UPTET Paper Leak : 28 नवंबर 2021 को आयोजित होने वाली, 23 जनवरी 2022 को कराई गयी।
- वर्ष 2022 : UP Lekhpal Paper (ब्लूटूथ, सॉल्वर गैंग और नकल के मामले) : 31 जुलाई 2022 को आयोजित हुआ।
- वर्ष 2023 : सीधी रद्द परीक्षा कम, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं पर तनाव बरकरार : साल 2023 UPSSSC VDO री-एग्जाम जो 26-27 जून 2023 को आयोजित हुआ।
- वर्ष 2024 : पुलिस कांस्टेबल, RO/ARO, NEET और UGC-NET से भरोसे पर बड़ा आघात : साल 2024 में शनल और स्टेट लेवल पर हुए बड़े पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने की घटनाओं को एक साथ समेटता है।
- यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024 : 60,244 पद और 48 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की उम्मीद : पहली बार रद्द हुई। 17 और 18 फरवरी 2024 को यह परीक्षा 4 शिफ्टों में कराई गयी। दूसरी बार (Re-Exam) : 23, 24, 25, 30 और 31 अगस्त 2024 को सफलतापूर्वक आयोजित की गयी।
- यूपीपीएससी RO/ARO प्रारंभिक परीक्षा 2024 : प्रतिष्ठित आयोग की परीक्षा पर सवाल : पहली बार (रद्द हुई) : 11 फरवरी 2024 को परीक्षा आयोजित की गई। दूसरी बार (Re-Exam) : 27 जुलाई 2025 को परीक्षा आयोजित की गई।
- NEET-UG 2024 : राष्ट्रीय परीक्षा, यूपी के लाखों छात्रों पर असर: मुख्य परीक्षा : 5 मई 2024 को आयोजित की गई थी। इसके बाद पेपर लीक के आरोपों और 67 टॉपर्स आने की वजह से देश भर में भारी विवाद हुआ था। सीमित छात्रों का री-एग्जाम : ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1,563 छात्रों के लिए कोर्ट के आदेश पर 23 जून 2024 को दोबारा परीक्षा कराई गई थी।
- UGC-NET जून 2024 : उच्च शिक्षा और शोध पर संकट : 18 जून 2024 को पहली बार यह परीक्षा पूरे देश में पेन-पेपर (OMR) मोड पर कराई गयी। यह परीक्षा दोबारा CBT (कंप्यूटर आधारित) मोड में 21 अगस्त से 4 सितंबर 2024 के बीच कराई गयी।
- वर्ष 2025 : पुनर्परीक्षाओं और भर्ती विवाद का वर्ष : जुलाई 2025 में RO/ARO प्रीलिम्स का होना।
- RO/ARO री-एग्जाम 2025 : सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, लेकिन इंतजार लंबाश: 2024 में रद्द हुई 2 और 3 फरवरी 2026 को आयोजित की गयी।
- यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या-51 : 18 और 19 अप्रैल 2026 विज्ञापन संख्या- 51 के तहत 981 पदों के लिए यह लिखित परीक्षा अप्रैल 2026 में 2-2 शिफ्टों में कराई गयी।
- वर्ष 2026 : असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द और प्रवेश परीक्षाओं में बदलाव : उच्च शिक्षा विभागों में परीक्षाओं के पैटर्न को पूरी तरह बदलने, कुछ विज्ञापनों या पूर्व में प्रस्तावित तिथियों के संशोधन/रद्द होने, तथा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा नई नियमावलियों और प्रवेश परीक्षाओं (जैसे नए बीएड या एडेड कॉलेजों के एंट्रेंस) में किए गए प्रशासनिक बदलावों को रेखांकित किया गया है।
पांच साल का वर्षवार रिकॉर्ड: परीक्षा, पद और असर-
परीक्षा विवादों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘अभ्यर्थियों की संख्या’ और ‘पदों की संख्या’ अलग-अलग होती है। किसी परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी बैठ सकते हैं, लेकिन पद कुछ हजार हो सकते हैं। वहीं पात्रता परीक्षाओं में कोई पद नहीं होता, लेकिन भविष्य की भर्तियों का रास्ता खुलता है। यूपीटीईटी और UGC-NET जैसी पात्रता परीक्षाएं सीधी नौकरी नहीं देतीं, बल्कि करियर का रास्ता खोलती हैं। NEET-UG मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसका असर नौकरी पर नहीं, बल्कि कॉलेज सीटों और काउंसिलिंग पर पड़ता है। इसके विपरीत पुलिस कांस्टेबल, लेखपाल, RO/ARO और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी परीक्षाएं पद आधारित भर्तियां हैं। इसीलिए यह कहना कि हर परीक्षा में समान प्रकार का नुकसान हुआ, सही नहीं होगा। लेकिन यह कहना बिल्कुल सही है कि हर विवाद ने युवाओं के भरोसे को किसी न किसी स्तर पर तोड़ा।
परीक्षा धांधली का युवाओं पर असर-
परीक्षा धांधली का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो कर्ज लेकर किराए के कमरों में रहकर, परिवार से दूर रहकर वर्षों तैयारी करते हैं। जब परीक्षा रद्द होती है, तो केवल एक तारीख आगे नहीं बढ़ती, बल्कि छात्रों का पूरा जीवन-चक्र प्रभावित होता है। दोबारा परीक्षा का मतलब होता है, दोबारा यात्रा खर्च, दोबारा प्रवेश पत्र, दोबारा केंद्र तक पहुंचना, दोबारा रिवीजन और दोबारा मानसिक दबाव। कई छात्र नौकरी छोड़कर तैयारी करते हैं, कई परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा कोचिंग और रहने-खाने पर खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होना केवल प्रशासनिक सूचना नहीं, बल्कि घर-घर का आर्थिक और मानसिक संकट बन जाता है।
धांधली का तरीका बदला: व्हाट्सऐप से ब्लूटूथ और साइबर इनपुट तक-
बीते वर्षों में धांधली का तरीका बदलता हुआ दिखाई देता है। यूपीटीईटी में व्हाट्सऐप पर पेपर फैलने की बात सामने आई। लेखपाल परीक्षा में ब्लूटूथ और सॉल्वर गैंग की चर्चा हुई। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में संगठित नेटवर्क और परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठे। UGC-NET में साइबर और परीक्षा की अखंडता से जुड़े इनपुट के आधार पर परीक्षा रद्द हुई। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में आंतरिक मिलीभगत और पेपर बेचने के आरोप सामने आए। इससे साफ है कि अब परीक्षा सुरक्षा केवल परीक्षा कक्ष तक सीमित नहीं रह सकती। पेपर निर्माण, प्रिंटिंग, पैकिंग, परिवहन, केंद्र आवंटन, डिजिटल सुरक्षा, बायोमेट्रिक पहचान, जैमर, सीसीटीवी और साइबर निगरानी—सभी कड़ियों को मजबूत करना होगा।
क्या सुधार जरूरी हैं?
- जवाबदेही : केवल छोटे दलालों को पकड़ना काफी नहीं है। पेपर लीक के मुख्य स्रोत तक पहुंचना होगा। यदि किसी स्तर पर आंतरिक मिलीभगत है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- नया परीक्षा सुरक्षा मॉडल : बड़ी परीक्षाओं में डिजिटल गोपनीयता, कोडेड पेपर सेट, रैंडम वितरण, सुरक्षित परिवहन और अंतिम समय में प्रश्नपत्र खोलने की व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।
- केंद्रों पर कड़ी चेकिंग : बायोमेट्रिक हाजिरी, लाइव सीसीटीवी निगरानी, मेटल डिटेक्टर,
जैमर और अलग-अलग स्तरों पर सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए।
- समय सीमा : यदि किसी परीक्षा को रद्द करना पड़े, तो दोबारा परीक्षा की तारीख,
- परिणाम और आगे की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी होनी चाहिए।
- छात्रों को राहत : प्रशासनिक चूक के कारण परीक्षा रद्द होने पर छात्रों को परीक्षा शुल्क, यात्रा खर्च या अन्य राहत पर विचार होना चाहिए। ईमानदार परीक्षार्थियों को हर बार सजा नहीं मिलनी चाहिए।
- अफवाहों पर नियंत्रण : झूठी और भ्रामक खबरों पर भी कार्यवाही जरूरी है। कई बार झूठी खबरें भी छात्रों में घबराहट और अविश्वास फैला देती हैं। इसलिए सत्यापित सूचना समय पर जारी करना जरूरी है।
निष्कर्ष :-
बीते पांच वर्षों का रिकॉर्ड यह बताता है कि उत्तर प्रदेश में भर्ती, पात्रता, प्रवेश और उच्च शिक्षा से जुड़ी परीक्षाएं कई बार धांधली, पेपर लीक, तकनीकी चूक या प्रशासनिक विवादों के घेरे में आयी। हर परीक्षा लीक नहीं हुई, हर स्थगन धांधली नहीं था, लेकिन बार-बार उठते सवालों ने युवाओं के भरोसे को कमजोर किया। युवाओं की मांग बहुत सरल है। वे मेहनत कर सकते हैं, संघर्ष कर सकते हैं, किराये के कमरे में रह सकते हैं, रात-दिन पढ़ सकते हैं, बार-बार प्रयास कर सकते हैं; लेकिन वे धांधली बर्दाश्त नहीं कर सकते। वे चाहते हैं कि परीक्षा समय पर हो, निष्पक्ष हो, सुरक्षित हो और परिणाम भी समय पर आये। सरकार और परीक्षा संस्थाओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा को केवल आयोजित करना काफी नहीं है। उसे सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना भी उतना ही जरूरी है। क्योंकि किसी एक परीक्षा का पेपर लीक होना केवल एक भर्ती को प्रभावित नहीं करता, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और व्यवस्था में विश्वास को चोट पहुंचाता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल नौकरी या दाखिले का माध्यम नहीं हैं। वे युवाओं के जीवन की दिशा तय करती हैं। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुरक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। जब तक हर परीक्षा पर अभ्यर्थी को भरोसा नहीं होगा, तब तक चयनित उम्मीदवार की खुशी और असफल उम्मीदवार का भरोसा — दोनों अधूरे रहेंगे।

अभिषेक मौर्य
प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर उत्तर प्रदेश लखनऊ




